त्रिवेंद्रम मेरे पिता का गृहग्राम |केरल की राजधानी मानी जाने वाली यह दिव्या नगरी का शुद्ध नाम तिरुअनंतपुरम है |पुराणों में इसका उल्लेख अनंतवनम के नाम से है |यह प्राचीन त्रावनकोर राज्य तथा वर्तमान में त्रावनकोर -कोचीन प्रदेश ,केरल की राजधानी है |नगर के मध्य में यहाँ के राजा का किला है |किले के भीतर ही पद्मनाभ मंदिर है जिसमे भगवन विष्णु पद्मनाभ स्वरुप में अनन्त शैया में प्रतिस्थापित है |इन्हें अनन्त शयन भी कहते है |यह मंदिर हमारे घर के पास ही होने के कारण मै केरल जाने पर इस मंदिर के हमेशा दर्शन करती हु |शेषशैया में शयन किये भगवान पद्मनाभ की विशालमूर्ति देखने पर लगता है मानो सक्षात भगवान लेटे हो |मंदिर की दिव्यता वहा जाने पर ही बयान हो सकती है |मंदिर के अन्दर कई गोपुरम है जिनमे वास्तुकला का अतिप्राचीन कलाकौसल देखने को मिलता है |मुख्या मंदिर के चारो और देवी देवताओ के विभिन्न मुद्राओ में मुर्तिया स्थापित है जो प्राचीनकाल के राजाओ की ख्याति .समृद्धि और उत्कृष्ट कारीगरों के कला का स्वयं परिचय देती है |भगवान् की इतनी बड़ी मूर्ति मैंने कभी नहीं देखि न ही अन्य जगह पर होगी |
भगवान् के नाभि से निकले कमल पुष्प में ब्रम्हाजी विराजमान है |भगवान का दाहिना हाथ शिवलिंग के ऊपर पर स्थित है |इस मूर्ति का श्रीमुख के दर्शन पहले द्वार से वक्षस्थल तथा नाभि के दर्शन द्वितीय द्वार से और श्री चरणों के दर्शन तीसरे द्वार से होते है |मंदिर से बाहर आकर प्रदिक्षना करने पर मंदिर के पूर्व में स्वर्णमंडित गरुड स्तम्भ है |दक्षिण भाग में हरिहर पुत्र का छोटा मंदिर है |मंदिर के पश्चिम भाग में श्रीकृष्ण का मंदिर है |मंदिर के दक्षिण भाग में एक शिशु विग्रह है |श्रीदेवी ,भूदेवी ,नीलादेवी भगवान की तीन शक्तिओ का विग्रह भी शोभनीय है |वर्ष २०१० में मेरी केरल यात्रा के दौरान मुझे सपरिवार पुनः पद्मनाभ स्वामी के दर्शन का सौभाग्य मिला |मंदिर के अहाते में पहुचते ही काफी भीड़ के कारण धक्का -मुक्की में भगवान के दर्शन मिले पसीने से तर -बदर मंदिर के एक कोने में जा कर मै अपनी मम्मी के साथ खड़ी हो गयी |मंदिर की मूर्ति और अन्य विग्रह काले कसौटी के पत्थर से बना हुआ है जिस पर स्वर्ण की परत जड़ दी गयी है | |नमी के कारण जमीं पर मेरे पैर फिसलने लगे थे |मैंने मम्मी से यु ही तुक्के में कहा जहाँ पर खड़ी हु वहा जरुर कुछ है |नीचे कही तहखाना तो नहीं ?यहाँ की उष्णता और वातावरण सहज नहीं है |नीचे मेरे पैर के पास किसी का चढाया सिक्का गिरा हुआ था मैंने उसे उठा कर दान पेटी में चढाया और मम्मी से कहा की यहाँ बहुत धन है |और केरल से आने के बाद २०११ में जब पद्मनाभ स्वामी क्षेत्र में अत्यधिक सोने चांदी का खजाना मिला। सुन कर मै और मम्मी एक दुसरे का मुह देखने लगे |भगवान् के गर्भ गृह में ना जाने कितने खजाने है |पर मै उनका सानिध्य अपने जीवन में पद्मपुष्प की तरह चाहती हु |जो मुझे विकारों से हमेश मुक्त रख मुझे ज्ञान का खजाना दे |
भगवान् के नाभि से निकले कमल पुष्प में ब्रम्हाजी विराजमान है |भगवान का दाहिना हाथ शिवलिंग के ऊपर पर स्थित है |इस मूर्ति का श्रीमुख के दर्शन पहले द्वार से वक्षस्थल तथा नाभि के दर्शन द्वितीय द्वार से और श्री चरणों के दर्शन तीसरे द्वार से होते है |मंदिर से बाहर आकर प्रदिक्षना करने पर मंदिर के पूर्व में स्वर्णमंडित गरुड स्तम्भ है |दक्षिण भाग में हरिहर पुत्र का छोटा मंदिर है |मंदिर के पश्चिम भाग में श्रीकृष्ण का मंदिर है |मंदिर के दक्षिण भाग में एक शिशु विग्रह है |श्रीदेवी ,भूदेवी ,नीलादेवी भगवान की तीन शक्तिओ का विग्रह भी शोभनीय है |वर्ष २०१० में मेरी केरल यात्रा के दौरान मुझे सपरिवार पुनः पद्मनाभ स्वामी के दर्शन का सौभाग्य मिला |मंदिर के अहाते में पहुचते ही काफी भीड़ के कारण धक्का -मुक्की में भगवान के दर्शन मिले पसीने से तर -बदर मंदिर के एक कोने में जा कर मै अपनी मम्मी के साथ खड़ी हो गयी |मंदिर की मूर्ति और अन्य विग्रह काले कसौटी के पत्थर से बना हुआ है जिस पर स्वर्ण की परत जड़ दी गयी है | |नमी के कारण जमीं पर मेरे पैर फिसलने लगे थे |मैंने मम्मी से यु ही तुक्के में कहा जहाँ पर खड़ी हु वहा जरुर कुछ है |नीचे कही तहखाना तो नहीं ?यहाँ की उष्णता और वातावरण सहज नहीं है |नीचे मेरे पैर के पास किसी का चढाया सिक्का गिरा हुआ था मैंने उसे उठा कर दान पेटी में चढाया और मम्मी से कहा की यहाँ बहुत धन है |और केरल से आने के बाद २०११ में जब पद्मनाभ स्वामी क्षेत्र में अत्यधिक सोने चांदी का खजाना मिला। सुन कर मै और मम्मी एक दुसरे का मुह देखने लगे |भगवान् के गर्भ गृह में ना जाने कितने खजाने है |पर मै उनका सानिध्य अपने जीवन में पद्मपुष्प की तरह चाहती हु |जो मुझे विकारों से हमेश मुक्त रख मुझे ज्ञान का खजाना दे |








