शिरडी के साईं बाबा के प्रति मेरी आस्था बचपन से रही है |यहाँ आने का सौभाग्य मुझे तीसरी बार १०अगस्त २०१३ को पुनः मिला ,मेरी यात्रा के दौरान इस पावन धरती को चरणस्पर्श कर मै स्वयं को धन्य मानती हु |जीवन में बिना गुरु के ज्ञान संभव नहीं है मेरे गुरु साईं बाबा रहे है जो मेरे लिए इस धरती पर प्रत्यक्ष सूर्य है जिन्होंने काफी कठिनाई से अपना जीवन व्यतीत किया और लोगो के बीच ज्ञान ,आस्था ,विश्वाश और समानता के दीप जला दिए |बाबा सच्चे सद गुरु है |शिर्डी आने के बाद आज मेरे मन में अपार शांति है |दुःख के बाद सुख का आना संसार का नियम है वही बाबा का हर परिस्थिति में सौम्य रहना जीवन का यथार्थ सत्य है |मैंने अपने जीवन में बाबा से बहुत कुछ सीखा है |आज मै जो कुछ भी हु बाबा की कृपा से हूँ |
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